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    LAPPM (Lucknow Association of practicing pathologists and microbiologists ) is an association of genuine pathologists and microbiologists of Lucknow which helps the state to have genuine labs in our territory we have done more than 10,000 free test of patients [Blood Sugar, Urea, Blood group) LAPPM days i.e. 2nd October till 2014, we also help the society to spread awareness during epidemics of swine flu, Dengue, Malaria, Chikungunya, Encephalitis fevers regarding this we conduct C.M.E in schools, I.M.A and colleges collocating people not to panic and have faith in medical system of the state and country.

    How to choose a genuine Pathology Lab. Criterias that should be followed by genuine Pathology Lab are as follows:-

    1. Pathology Lab must be run by a Doctor with MD [Pathology] / MD [Microbiology] / DCP Degree  after MBBS.
    2. Lab to be enrolled in CMO office
    3. Doctors name & timing to be displayed in clinic with his/her physical presence in that clinic.
    4. Degree of the doctors to be displayed in his/ her chamber
    5. Collection norms Like Sterilized syringes, needle incinerator to be there at collection table.
    6. Biomedical waste must be given to state passes authority
    7. Modern machine can be shown to the patient on request to prove that test is done in – situ [Inside that particular clinic]
    8. Know your Pathologist and his Credential before giving Sample for test.
    9. A proper area for reception and adequate space for collection of patients blood and samples
    10. Laboratory staff to should observe universal precautions during Collection.

    पैथोलॉजी क्या है ?

    पैथोलॉजी शरीर के किसी भी भाग की सामान्य संरचना के कार्य प्रणाली में खराबी है जो विभिन्न प्रकार की बीमारियो को जन्म देती है! रोग परीक्षण विशेषग  अथार्त पैथोलोजिस्ट या माइक्रो बायोलॉजिस्ट रक्त के नमूने, टिशू, बलगम तथा बॉडी फ्लूड आदि  की जाँच  करके बिमारी का निदान करते है  इस प्रकार आपके सटीक रोग निदान इलाज की दिशा तय करती है। आपके चकित्सक द्धारा  मांगी गयी जाँच की पैथोलॉजी रिपोर्ट आपके लिए अनुमान से चल रही दवाओं  पर खर्च होने वाले सैंकड़ो रुपये व आपका अमूल्य समय तथा शाररिक व् मानसिक क्षति को बचा सकती है ।

    पैथोलॉजी जाँच सटीक कैसे हो ?


    पैथोलॉजी जाँच रिपोर्ट की उत्तम गुणवत्ता तथा आपके लिए उसका समुचित लाभ निम्न बातो से प्रभावित होता है

    १-जाँच के पूर्व की सावधानियाँ  :

     

    १-क्या आपके चिकत्सक ने आपकी बीमारी के अनुसार सारी जाँच करवायी है।
    २ -क्या आपने उन जाँचों  के लिए अपने डॉक्टर से  पैथोलॉजी लैब में सैंपल देने से पूर्व परिस्थितिओं व तैयारियों को जान लिया है ।
    ३-सटीक जाँच के लिए लैब पर स्वयं जाकर सैंपल देना सर्वोत्तम होता है।


    उपरोक्त सब बातो को जान लेना जरुरी है विशेषकर आपको यह जरुरी समझ लेना चाहिए की जाँच  के लिए सैंपल किस प्रकार देना है । रक्त की अधिकांश जाँचो के  लिए प्रातः खाली पेट रक्त देना बेहतर है तथा (लिपिड प्रोफाइल, कोलेस्ट्रोल ) प्रोटीन्स तथा शुगर की जाँच के लिए रात के खाने से १० से १२ घंटे का अंतराल होना आवश्यक है । यह जरुरी है की रोजमर्रा वाला सामान्य खाना ही जाँच के पूर्व वाली रात में खाना चाहिए । वीर्य, मूत्र, मल, बलगम आदि की जाँच , के लिए भी कई बातो का ध्यान रखा जाना चाहिए और विशेषकर जाँच के लिए शीशी या विशेष कीटाणुमुक्त कप पैथोलॉजी लैब से लेना चाहिए ।


    रक्त की विशेष जाँचों जैसे हारमोन्स आदि के लिए जाँच, लैब के दवारा ४-६ घंटे में कर देनी चाहिए यदि ऐसा ना सम्भव हो तो रक्त के सीरम को ४ डिग्री सेंटीग्रेट से कम तापमान पर जमा कर रखना चाहिए ऐसी विशेष जाँचो के लिए रक्त सैंपल बाहर भेजे जाने के स्थिति में इन मानकों का पालन ज्यादातर नहीं हो पाता  है अतः पूणर्तया सटीक रिपोर्ट के लिए मरीज को विशेष लैब में  स्वय जाकर जाँच का सैंपल देना चाहिए ।


    बाहर भेजे जाने वाले सैंपल में उच्च तापमान तथा घर्षण के कारण कई प्रकार की जाँचों की रिपोर्ट में काफी अंतर आ जाता है
    ध्यान रखे जाँच के पूर्व  असावधानी के कारण जाँचों रिपोर्ट में होने वाली गलती की संभावना ५०%  तक होती है

    २- जाँच के समय की सावधानियां :

    जाँच के परिणामो में होने वाली गलतियों में से ४५% मामलो में जाँच के दौरान की असावधानी ही गलत रिपोर्ट का कारण होते है । जाँच के लिए निम्न बातो का ध्यान आवश्यक है ।


    १- लैब के द्वारा प्रयुक्त जाँच की उच्चतर तकनीकी का प्रयोग
    २- तकनिकी रूप से सक्षम अच्छी मशीन का प्रयोग
    ३- जाँच के लिए गुणवक्तापूर्ण कैमीकल्स का प्रयोग
    ४- जाँच के लिए केमिकल्स व रक्त का सही मापन करने के लिए अच्छी मापन प्रणाली का प्रयोग
    इन तथ्यों का हर अच्छी गुणवक्ता वाली लैब में पालन किया जाता है ।

     

    ३- जाँच के बाद की सावधानियाँ :

    लगभग ५ प्रतिशत मामलो में जाँच के बाद लापरवाही गलत रिपोर्ट का कारण बनती हैं । इनमे मुख्यतः गलती टाइपिंग एरर तथा मरीज से सम्बंधित तथ्यों का सही दर्ज नही होना तथा अपने से सम्बंधित पूर्ण जानकारी मरीज    द्वारा नहीं दिया जाना हो सकता है |

    क्या जाँच के लिए चिकित्सक की सलाह जरुरी है ।


    आमतौर तौर पर  पैथोलॉजी जाँच कराने के पूर्व अपने चिकित्सक से सलाह लेना आपके लिए आवश्यक है क्योकि वो आपके लक्षणों के आधार पर आपके लिए उपयुक्त जाँच बता सकते है तथापि कुछ ऐसी जाँचे है जिन्हे कुछ परिस्थियों में आप स्वयं भी किसी अच्छे पैथोलॉजी लैब द्वारा करवा सकते है  जैसे रक्तल्पता के लिए "हीमोग्लोबिन " महुमेह के लिए ब्लड शुगर की जाँच आदि ।


    सामन्यतया ३५ वर्ष की आयु के बाद साल में एक बार ब्लड काउंटस यानी हीमोग्लोबिन , टी.एल. सी., डी.एल.सी.,प्लेटलेट, ब्लडशुगर तथा मूत्र की साधारण जांच करवाते रहना चाहिए तथा ४० वर्ष के बाद उपरोक्त के अलावा साल एक बार लिपिड प्रोफाइल ,जिगर व गुर्दो की जाँचे तथा पुरुषो में " प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन " (PSA )तथा महिलाओ में "पैप स्मीयर " जाँच जरूर करवाते रहना चाहिए ।

     

     

     
    Dr. P.K. Gupta
    Contact 9415541789 
    Dr. Archana Singh
    Contact 9335906708 
    Dr. Saket Mehrotra
    Contact 9936199919 
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